गौतमबुद्ध नगर जिले में रहने और काम करने वालों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसें चलने का रास्ता साफ हो गया है। नोएडा को 300 बसें मिलेंगी जबकि ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी क्षेत्र को 100-100 बसें मिलेंगी।
गौतमबुद्ध नगर जिले में रहने और काम करने वालों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। नोएडा को 300 बसें और ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को 100-100 बसें मिलेंगी। ये बसें नौ और 12 मीटर लंबी होंगी। इसको लेकर सोमवार को उत्तर प्रदेश के नगरीय परिवहन निदेशालय में परियोजना की वित्तीय बिड खोली गई।
प्राधिकरण अधिकारी ने बताया कि वित्तीय बिड में कुल नौ कंपनियों ने आवेदन किया था, जिसमें सबसे कम दरों पर बसों का संचालन करने के प्रस्ताव पर दो एजेंसियों का चयन किया गया। अब तीनों प्राधिकरणों का एक संयुक्त विशेष प्रायोजन संगठन (एसपीवी) बनाया जाएगा। एसपीवी को अनुबंध से पहले इन दोनों चयनित एजेंसियों से दरों को कम करने के लिए बातचीत करने का अवसर भी मिलेगा। यह सार्वजनिक परिवहन सेवा सकल लागत अनुबंध (जीसीसी) मॉडल पर संचालित होगी। 500 बसों के संचालन, आवश्यक संसाधनों और अन्य खर्चों को मिलाकर परियोजना पर 675 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रत्येक बस को प्रति वर्ष 72000 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। तीनों प्राधिकरण स्तर पर एसपीवी के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस परियोजना का नेतृत्व नोएडा प्राधिकरण करेगा।
नोएडा की हिस्सेदारी 48 फीसदी, ग्रेटर नोएडा और यमुना की हिस्सेदारी 26-26 फीसदी तय की गई है। बस संचालन का खर्च तीनों प्राधिकरणों में समान अनुपात में बांटा जाएगा। बस सेवा का संचालन और रूट व किराया एसपीवी ही तय करेगी।
9 और 12 मीटर लंबी होंगी
जिले में चलने वाली नौ मीटर लंबी ई-बस की क्षमता 28 यात्रियों, एक विकलांग यात्री और चालक की होगी। जबकि, 12 मीटर लंबी ई-बस की यात्री क्षमता चालक और विकलांग यात्री को छोड़कर 36 यात्रियों की होगी। 250 बसें नौ मीटर लंबी और 250 बसें 12 मीटर लंबी होंगी।
दो कंपनियों का चयन
ट्रेवल टाइम मोबिलिटी एजेंसी को सबसे कम नौ मीटर की बस 54.90 रुपये प्रति किलोमीटर पर चलाने के लिए चुना गया। वहीं, डेलबस मोबिलिटी को 67.90 रुपये प्रति किलोमीटर पर 12 मीटर लंबी बस चलाने के लिए चुना गया। अभी गठित होने वाली एसपीवी के पास इन दरों पर बातचीत करके उन्हें कम करने का विकल्प होगा। बसों की संख्या के अनुपात में दरों और रूट पर मिलने वाले यात्रियों से लिए जाने वाले किराए के बीच का अंतर तीनों प्राधिकरणों को चुकाना होगा।