नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने की घड़ी नजदीक, इंटरचेंज का इंतजार

ईपीई (ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे) और यमुना एक्सप्रेस वे को जोड़ने के लिए इंटरचेंज के निर्माण में विलंब हो रहा है। यमुना प्राधिकरण (यीडा) ने इंटरचेंज निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंपी है।

यीडा अधिकारियों का दावा है कि आठ माह में इंटरचेंज बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बनने से हरियाणा व उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोगों को फायदा होगा। एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे के बीच निर्बाध आवाजाही हो सकेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की भी सीधे कनेक्टिविटी हो जाएगी।

ईपीई और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए जगनपुर अफजलपुर के नजदीक इंटरचेंज का निर्माण पिछले छह साल से अटका हुआ है। यीडा ने 2019 में इंटरचेंज निर्माण की जिम्मेदारी दिल्ली की देव एस कंपनी को दी थी। लेकिन किसानों के विरोध के कारण इंटरचेंज की जमीन पर कब्जा न मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। किसानों से सहमति लेने में कई वर्ष लग गए।

इसके चलते परियोजना की लागत 75 करोड़ से अधिक हो गई, लेकिन बढ़ी हुई लागत को लेकर कंपनी के साथ सहमति न बनने से एनएचएआई को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2023 में तत्कालीन मुख्य सचिव डीएस मिश्रा ने कार्य का शुभारंभ भी किया, लेकिन नारियल फोड़ने से आगे कार्य नहीं बढ़ पाया। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने में काफी समय लग गया। साठ हेक्टेयर में आठ लूप के इंटरचेंज के निर्माण पर 270 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यीडा के सेक्टर भी इससे जोड़े जाएंगे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हरियाणा व पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों से कनेक्टिविटी के लिए इंटरचेंज का निर्माण बेहद जरूरी है। इसके बनने के बाद दोनों राज्यों के विभिन्न जिलों से लोग सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। इसके अलावा मथुरा, आगरा आदि की राह भी आसान हो जाएगी।

दोनों एक्सप्रेसवे के आपस में न जुड़े होने के कारण अभी सिरसा कट पर उतरकर यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट जाना पड़ता है। इससे करीब पंद्रह किमी अतिरिक्त तय करनी पड़ती है। शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बनती है। इंटरचेंज बनने के बाद यह दूरी कम हो जाएगी और समय की बचत हो्गी। ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।

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