हरियाणा के पलवल और उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट के बीच सफर जल्द ही और आसान होने वाला है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पलवल-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है.
परियोजना के तहत यूपी सीमा में सड़क को चौड़ा और समतल किया जा रहा है, जबकि हरियाणा क्षेत्र में निर्माण कार्य के दायरे में आ रहे पेड़ों की कटाई की जा रही है. इसके साथ ही यमुना नदी पर प्रस्तावित नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की संभावना है. एक्सप्रेसवे बनने से करीब एक लाख लोगों और वाहन चालकों को प्रतिदिन बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
पलवल से अलीगढ़ के बीच करीब 72 किलोमीटर लंबा मार्ग लंबे समय से खराब हालत में है. सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, स्ट्रीट लाइट की कमी और मानसून के दौरान फिसलन के चलते हादसों का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोग कई बार प्रशासन से सड़क सुधार की मांग कर चुके थे. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए NHAI ने मौजूदा मार्ग को चार लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है.
पलवल से अलीगढ़ के बीच करीब 72 किलोमीटर लंबा मार्ग लंबे समय से खराब हालत में है. सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, स्ट्रीट लाइट की कमी और मानसून के दौरान फिसलन के चलते हादसों का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोग कई बार प्रशासन से सड़क सुधार की मांग कर चुके थे. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए NHAI ने मौजूदा मार्ग को चार लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है.
हरियाणा की सीमा में आने वाले रहीमपुर गांव के पास सड़क किनारे मौजूद पेड़ों की कटाई की जा रही है. वहीं यूपी क्षेत्र में अलीगढ़-टप्पल रोड पर जुप्पा गांव के नजदीक मिट्टी भराव, लेवलिंग और चौड़ीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. निर्माण की राह में आ रहे अवैध ढांचों को हटाने की भी तैयारी की जा रही है.
इस परियोजना में खैर कस्बे के बाहरी इलाके में बाईपास निर्माण को प्राथमिकता दी गई है. जप्पा, रहीमपुर, ऐंचना, उदयगढ़ी, लक्ष्मणगढ़ी और बांकनेर गांवों के पास काम जारी है. लक्ष्मणगढ़ी क्षेत्र में कट निर्माण भी शुरू हो चुका है. अधिकारियों के अनुसार, अगले एक साल में बाईपास को तैयार कर लिया जाएगा, जिससे कस्बे में लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत मिलेगी.
एक्सप्रेसवे के बन जाने से अलीगढ़, पलवल, यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी. इसके साथ ही दिल्ली, नोएडा, एनसीआर, गुरुग्राम और हरियाणा के अन्य शहरों तक आवागमन पहले से कहीं ज्यादा सुगम हो जाएगा.