दिल्ली-एनसीआर खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक अहम खबर है. रियल कंसल्टेंसी फर्म कोलियर्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट के कहा है कि, दिल्ली के मुख्य इलाकों और ग्रेटर नोएडा जैसे बाहरी इलाकों के बीच प्रॉपर्टी के दामों का अंतर अब स्थिर हो गया है. साथ ही आगे इस अंतर के और कम होने का आसार है. इसका सीधा मतलब है कि शहर के बाहरी इलाके अब केवल सस्ते विकल्प नहीं रहे, बल्कि तेजी से प्रीमियम लोकेशन में बदल रहे हैं. इसका अहम कारण इंफ्रास्ट्रक्चर की त्रिमूर्ति जैसे मेट्रो, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के कारण बाहरी इलाके में कनेक्टिविटी अच्छी हुई है.
इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के बेहतर होने से घरों की डिमांड में जबरदस्त इजाफा हुआ है.
ऐसे में यदि आप यह उम्मीद लगा रहे हैं कि ग्रेटर नोएडा या बाहरी इलाकों में प्रॉपर्टी हमेशा सस्ती होगी, तो आप गलती कर रहे हैं.
आने वाले साल में और कम होगा प्राइस आर्बिट्रेज
कोलियर्स के रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एनसीआर के सेंट्रल और बाहरी इलाकों में यह प्राइस आर्बिट्रेज (कीमतों का अंतर) आने वाले साल में और कम होने की संभावना है.
सस्ते घर खरीदने का मौका खत्म
बाहरी इलाकों के दाम मुख्य शहर के करीब पहुंचने लगेंगे, जिससे वहां सस्ता घर खरीदने का मौका खत्म हो सकता है.
घर खरीदारों के लिए एक राहत की बात यह है कि पिछले 15 सालों में लोगों की इनकम बढ़ने से घर खरीदना पहले के मुकाबले आसान हुआ है.
दिल्ली एनसीआर में प्राइस टू इनकम रेश्यो में भारी सुधार हुआ है. ये रेश्यो जितना कम होता है, घर उतना ही किफायती माना जाता है.
कितना बढ़ा प्राइस टू इनकम रेश्यो
कोलियर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2010 में प्राइस टू इनकम रेश्यो 63.8 था, जो यह दर्शाता है कि उस वक्त इनकम के मुकाबले घरों की कीमत बहुत ज्यादा थीं. साल 2015 में यह रेश्यो घटकर 33.6 पर आ गया, जिससे स्थिति में बड़ा सुधार होता दिखा. इसके बाद साल 2020 में यह और गिरकर 29.0 हो गया. साल 2025 में यह 27.8 के स्तर पर पहुंच गया है. इस लगातार गिरावट से संकेत है कि लोगों की औसत इनकम बढ़ने से दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदना अब पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो गया है.