जेवर एयरपोर्ट की रफ्तार से बढ़ी घरों की डिमांड, ग्रेटर नोएडा में रेडी-टू-मूव फ्लैटों की नई शुरुआत

प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि योजना के तहत लाए गए सभी फ्लैट टू बीएच के हैं. इनका कार्पेट एरिया 83.38 वर्ग मीटर और सुपर एरिया 104.70 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है. फ्लैट 1 से लेकर 15वीं मंजिल तक स्थित हैं. फ्लोर के अनुसार इनका रिजर्व प्राइस 73.23 लाख रुपये से 74.35 लाख रुपये तक रखा गया है.

ग्रेटर नोएडा से बड़ी खबर सामने आई है. जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण और आसपास तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर का असर अब ग्रेटर नोएडा के आवासीय बाजार पर साफ नजर आने लगा है. इसी कड़ी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर ओमिक्रॉन-1ए में पहले से निर्मित टू बीएचके फ्लैटों की योजना को एक बार फिर रफ्तार देने का प्रयास किया है.

प्राधिकरण ने 28 जनवरी को 90 रेडी-टू-मूव फ्लैटों की योजना ई-नीलामी के माध्यम से लांच की है, जिसे लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है. प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि सेक्टर ओमिक्रॉन-1ए में बहुमंजिला आवासीय फ्लैटों का निर्माण वर्ष 2014 में शुरू किया गया था और ये फ्लैट वर्ष 2018 तक पूरी तरह तैयार हो गए थे.

हालांकि, उस समय इस क्षेत्र में आबादी कम होने और कनेक्टिविटी के सीमित विकल्पों के कारण लोगों की रुचि अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन पाई. इसके चलते बड़ी संख्या में फ्लैट खाली रह गए. वर्ष 2023 में प्राधिकरण ने इन फ्लैटों को डायरेक्ट अलॉटमेंट के जरिए बेचने का प्रयास भी किया, लेकिन तब भी योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी.

अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. जेवर एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित मेट्रो कनेक्टिविटी और आसपास बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के चलते ओमिक्रॉन और उसके आसपास के सेक्टरों में तेजी से बसावट बढ़ रही है. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए प्राधिकरण ने इस बार रणनीति बदलते हुए फ्लैटों का आवंटन डायरेक्ट न करके ई-नीलामी के जरिए करने का फैसला लिया है.

प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह के अनुसार वर्तमान में ओमिक्रॉन-1ए में करीब 350 फ्लैट रिक्त हैं. पहले चरण में 90 फ्लैटों की योजना लाई गई है. यदि इस योजना को अच्छा प्रतिसाद मिलता है, तो आगे और फ्लैटों को भी चरणबद्ध तरीके से योजना में शामिल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि लोगों की ओर से लगातार इस क्षेत्र में आवासीय योजना लाने की मांग की जा रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.

उन्होंने बताया कि योजना के तहत लाए गए सभी फ्लैट टू बीएच के हैं. इनका कार्पेट एरिया 83.38 वर्ग मीटर और सुपर एरिया 104.70 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है. फ्लैट 1 से लेकर 15वीं मंजिल तक स्थित हैं. फ्लोर के अनुसार इनका रिजर्व प्राइस 73.23 लाख रुपये से 74.35 लाख रुपये तक रखा गया है. ई-नीलामी में सबसे अधिक बोली लगाने वाले आवेदक को फ्लैट का आवंटन किया जाएगा.

पंजीकरण की अंतिम तिथि 18 फरवरी तय की गई है, जबकि प्रोसेसिंग फीस जमा करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी और दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि 23 फरवरी है. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और इच्छुक आवेदक https://gnida.etender.sbi के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. योजना से संबंधित विस्तृत ब्रोशर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

वहीं इसलिए मामले में प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि सेक्टर ओमिक्रॉन-1ए की लोकेशन बेहद महत्वपूर्ण है. यह 130 मीटर चौड़ी सड़क से सीधे जुड़ा हुआ है और आसपास जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं. सभी फ्लैट पहले से बने हुए हैं, इसलिए आवंटन और लीज डीड की प्रक्रिया पूरी होते ही आवंटियों को तुरंत पजेशन दिया जाएगा. इससे लंबे समय से किराए के मकान में रह रहे लोगों को बड़ी राहत मिल सकेगी.

बताया कि भुगतान के लिए एकमुश्त और किस्तों दोनों विकल्प दिए गए हैं. एकमुश्त भुगतान करने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि किस्तों में भुगतान करने वाले आवेदक दो वर्षों में चार किस्तों में राशि जमा कर सकेंगे. प्राधिकरण का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट और आसपास के विकास कार्यों के चलते यह योजना ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए एक बेहतर अवसर साबित होगी.

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