यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के 29 गांव बनेंगे आदर्श ग्राम, विकास के कामों पर 350 करोड़ खर्च करे

यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र के 29 गांव आदर्श बनेंगे। इसके लिए प्राधिकरण ने तैयारी तेज कर दी है। इनमें सड़क, सीवर, बिजली और डिजिटल लाइब्रेरी समेत अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्राधिकरण डीपीआर के तहत इन गांवों में काम कराएगा। प्राधिकरण के अधिकारी ने बताया कि यीडा क्षेत्र के 29 गांवों को आदर्श बनाने के लिए डीपीआर तैयार कराई गई थी, इनमें से नौ गांवों का काम लगभग पूरा हो गया है। हालांकि, प्राधिकरण ने अब तक कार्यों की गुणवत्ता की जांच नहीं की। गांवों में डीपीआर के तहत ही कार्यों की गुणवत्ता को परखा जाएगा, इसका विवरण मांगा गया है। इन सभी गांवों के विकास कार्य पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

वहीं, अन्य 20 गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की कवायद भी तेज कर दी है। इनमें से नौ गांव का काम चल रहा है, जबकि 11 गांवों को स्मार्ट बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं, जिन गांवों में काम पूरा हो गया है, उन गांवों में प्राधिकरण की टीम निरीक्षण करेगी। यहां हर कार्य का डीपीआर से मिलान किया जाएगा, देखा जाएगा कि डीपीआर में सड़क कैसे बननी थी जबकि मौके पर किस तरीके की है। साथ ही कब तक काम पूरा होना था और कब पूरा हुआ।

इसी तरह प्राधिकरण अन्य कामों का भी फ्लो चार्ट तैयार करेगा, ताकि गांवों में होने वाले कार्यों को गुणवत्तापूर्वक पूरा किया जा सके। इसके लिए प्राधिकरण ग्रामीणों की भी मदद लेगा।

काम में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी : विकास कार्यों में लापरवाही होने पर संबंधित ठेकेदार या कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होगी, यहां तक कि उन्हें ब्लैक लिस्ट करने पर भी विचार है। इसके साथ गुणवत्ता पूर्ण कार्य न मिलने पर भुगतान भी रोका जा सकता है। प्राधिकरण ने अब तक तक विकसित हुए नौ गांवों का डीपीआर के तहत विवरण मांगा है, जिसके अनुरूप कार्य की समीक्षा की जा रही है।

350 करोड़ रुपये खर्च होंगे
यमुना प्राधिकरण ने गांवों को आदर्श बनाने के लिए दिसंबर 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन सभी गांवों के विकास कार्य पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अभी तक नौ गांवों पर जो रकम खर्च हुई है, उसका भी ऑडिट कराया जाएगा। गांव के हिसाब से खर्च का ब्यौरा तैयार होगा। वहीं, किन गांवों में क्या क्या सुविधाएं विकसित हुई है, उनका अब क्या स्थिति हैं, यह सब जानने के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जाएगा।

आरके सिंह, सीईओ, यमुना विकास प्राधिकरण, “बरसात खत्म होने के बाद गांव गांव जाकर विकास कार्यों की गुणवत्ता परखी जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित कंपनी या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी। प्राधिकरण गांव में आधुनिक सुविधाएं विकसित कर उन्हें स्मार्ट बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

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