नोएडा के इन सेक्टरों में यूनिटेक की अधूरी परियोजनाओं में 9000 फ्लैट बनाने की तैयारी

नोएडा शहर में यूनिटेक की रुकी परियोजनाओं में करीब नौ हजार फ्लैट बनाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित प्रबंधन ने इन फ्लैटों के टावरों का नक्शा और भूखंड का ले आउट प्लान तैयार कर मंजूरी के लिए नोएडा प्राधिकरण में जमा किया है। अब प्राधिकरण नक्शों की जांच कर मंजूरी देगा। इसके बाद ही परियोजना में काम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यूनिटेक की परियोजनाओं में करीब 9-10 साल से काम बंद पड़ा था। करीब 17 साल से लोग फ्लैट पाने का इंतजार कर रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2006-07 में यूनिटेक को जमीन आवंटित करनी शुरू की थी। प्राधिकरण ने सेक्टर-96, 97, 98, 113 और 117 में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित की। कुछ साल बाद बिल्डर ने प्राधिकरण को जमीन की कीमत देनी बंद कर दी। इससे बिल्डर पर बकाया बढ़ता गया। इस बीच कुछ साल पहले किसी मामले में वर्ष यूनिटेक के चेयरमैन सहित अन्य लोग जेल चले गए। इससे मामला फंस गया। पिछले कुछ साल से यह मामला बिल्डर और नोएडा प्राधिकरण के बीच सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। पिछले साल न्यायालय ने कुछ बिंदुओं पर बिल्डर के पक्ष में फैसला सुनाया।

पिछले साल यूनिटेक के मामले में गठित प्रबंधन ने लॉन्च हो चुकी परियोजनाओं के नक्शे प्राधिकरण में जमा किए थे। इसके तहत प्राधिकरण ने जांच कर नक्शों को मंजूरी दे दी थी।

खास बात यह है कि बीते एक साल में कोर्ट में हुई सुनवाई में प्रबंधन ने तर्क दिया कि परियोजनाओं में खाली पड़ी जमीन पर बनने वाले फ्लैटों के नक्शे भी पास किए जाएं। इसके पीछे वजह यह है कि लॉन्च हो चुकी परियोजनाओं में काम पूरा करने के लिए पैसों की जरुरत होगी, जो खाली पड़ी जमीन पर फ्लैट बनने के बाद बेचने से आएंगे। जबकि प्राधिकरण इसका विरोध कर रहा था । प्राधिकरण का तर्क था कि पहले प्रबंधन बकाया दे, उसके बाद खाली जमीन पर फ्लैट के नक्शे पास किए जाएंगे। हालांकि, कोर्ट ने प्राधिकरण के तर्क को नहीं माना। ऐसे में अब यूनिटेक से जुड़े प्रबंधन ने खाली पड़ी जमीन पर भी फ्लैट बनाने की योजना तैयार कर उनसे संबंधित नक्शों को मंजूरी के लिए प्राधिकरण में जमा कर दिया है। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि अब सेक्टर-113 में 2312 और 117 में 4272 फ्लैट बनाने, सेक्टर-96, 97 एवं 98 में कुछ फ्लैट तैयार करने और भूखंड को मंजूरी के लिए नक्शा और ले आउट प्लान जमा किया है। इनकी जांच की जा रही है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

यूनिटेक बायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवनीत कुमार सरीन ने बताया उन्होंने सेक्टर-113 स्थित यूनिहोम-3 में वर्ष 2012 में एक फ्लैट बुक किया था, जो आज तक नहीं मिला। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में कुल 16 टावर बनने हैं, जिनमें से छह का स्ट्रक्चर खड़ा हो चुका है। इनमें से भी दो टावर का काम काफी हो चुका है।

यूनिटेक से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रबंधन नियुक्त कर रखा है। इसके अध्यक्ष वाई एस मलिक हैं। केंद्र सरकार का प्रबंधन बिल्डर की देखरेख में काम होगा। खरीदारों की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार को यूनिटेक लिमिटेड के लिए एक स्वतंत्र प्रबंधन नियुक्त करने का निर्देश दिया था।

प्राधिकरण ने बिल्डर को बीते सालों में अलग-अलग जगह करीब 179 हेक्टेयर जमीन आवंटित की थी। इसमें से करीब 90 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी हुई है। महत्वपूर्ण यह है कि प्राधिकरण ने अपना बकाया लेने के लिए न्यायालय में खाली पड़ी जमीन का आवंटन निरस्त कर अपने कब्जे में लेने की भी तर्क दिया था, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ।

अब तक पहले से लॉन्च यूनिटेक की परियोजनाओं में बनने वाले फ्लैटों के टावरों का नक्शा प्राधिकरण पास कर चुका है। इनमें कुछ स्थानों पर काम भी शुरू हो चुका है। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-96, 97, 98 में ग्रुप हाउसिंग के अलावा विलोज 1 और 2 के नाम से भूखंड की योजना है। इन सेक्टर में मुख्य रूप से यूनिटेक गोल्फ एंड कंट्री क्लब, अंबर, बरगंडी आदि परियोजना में 897 फ्लैट और भूखंड शामिल हैं। सेक्टर-113 में 6 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं हैं, जिनमें 1621 फ्लैट हैं।

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