नोएडा प्राधिकरण में किसानों को अधिक मुआवजा वितरित किए जाने के मामले में एसआइटी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। इसमें भूमि अधिग्रहण मुआवजे के अत्यधिक भुगतान, अधिकारियों व भूस्वामियों के बीच कथित मिलीभगत के मुद्दे पर पूछताछ करने का निर्देश दिया गया।
बता दें कि कोर्ट ने नोएडा के एक विधि अधिकारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए एसआइटी जांच का आदेश दिया था। इसमें कुछ भूस्वामियों को हकदार न होने के बावजूद अधिक मुआवजा दिए जाने के आरोपों था।
बुधवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की पीठ ने आदेश में कहा है कि डीजीपी उत्तर प्रदेश पिछली एसआइटी द्वारा चिह्नित मुद्दों को देखते हुए आइपीएस संवर्ग के तीन पुलिस अधिकारियों वाली एक एसआइटी गठित करेंगे। एसआइटी तुरंत प्रारंभिक जांच दर्ज करेगी।
पिछली एसआइटी द्वारा उजागर किए गए बिंदुओं की जांच करेगी। इस संबंध में फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ-साथ राज्य पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा को भी शामिल किया जाएगा। यदि एसआइटी प्रारंभिक जांच के बाद यह पाती है कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध किया गया है, तो वह मामला दर्ज करेगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
नोएडा के दैनिक कामकाज में पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण लाने के लिए एसआइटी रिपोर्ट की एक प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के समक्ष रखी जाए। इसे उचित एजेंडा मदों के साथ मंत्रिपरिषद के समक्ष उचित निर्णय लेने के लिए प्रस्तुत करेंगे। मुख्य सचिव नोएडा में मुख्य सतर्कता अधिकारी भी तैनात करेंगे। यह या तो आइपीएस संवर्ग से हों या सीएजी से प्रतिनियुक्ति पर हो। नागरिक सलाहकार बोर्ड का गठन चार सप्ताह के भीतर हो जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआइए) और सर्वोच्च न्यायालय की हरित पीठ द्वारा रिपोर्ट की स्वीकृति के बिना नोएडा में कोई भी परियोजना शुरू न हो। इसके बाद ही निर्माण होगा। इससे प्राधिकरण की मनमानी पर अंकुश लगेगा, परियोजना के के नाम पर अनाप शनाप पैसे की बर्बादी भी रुकेगी।
एसआइटी रिपोर्ट ने संकेत दिया कि 20 मामलों में भूस्वामियों को अत्यधिक मुआवज़ा दिया गया था। 1198 मामलों में भूस्वामियों को बढ़ा हुआ मुआवज़ा दिया गया, जबकि 1167 मामलों में अदालती निर्देश थे। इसमें 20 मामलों के संबंध में नोएडा के दोषी अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या लाभार्थियों और नोएडा के अधिकारियों के बीच मिलीभगत थी, एसआइटी ने बताया कि अधिकारियों, उनके परिवार के सदस्यों, भूस्वामियों और संबंधित अवधि के दौरान अधिकारियों द्वारा अर्जित संपत्तियों के बैंक खातों के विवरण, साथ ही 10 साल से अधिक पुराने दस्तावेज़ों की जांच करना आवश्यक है। रिपोर्ट में वित्तीय लेनदेन विशेषज्ञों सहित आय से अधिक संपत्ति के मामलों में विशेषज्ञता रखने वाली एक स्वतंत्र, विशिष्ट एजेंसी के गठन का भी सुझाव दिया गया है।