नोएडा एयरपोर्ट तक हाइड्रोजन बसें चलाने में होगी देरी, ड्राइवर-कंडक्टर पर फंसा पेंच

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक चलने वाली हाइड्रोजन बसों के संचालन में देरी होगी। इसका कारण बसों के लिए चालक और परिचालक देने पर सहमति नहीं बन पा रही है। प्राधिकरण ने रोडवेज से इसके लिए मांग की है।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने सात नवंबर को आयोजित 87वीं बोर्ड बैठक में नोएडा एयरपोर्ट तक हाइड्रोजन बसें चलाने का प्रस्ताव पास किया था। यह प्रस्ताव नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) की ओर से रखा गया था। ये बसें नवंबर में मध्य तक चलनी थी। बोर्ड बैठक में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में तय हुआ कि एनटीपीसी शुरू में तीन लग्जरी एसी बसें लगाएगी, जिनमें 45 सीटें होंगी। ये बसें एक बार हाइड्रोजन भरने पर करीब 600 किलोमीटर तक चल सकेंगी और इनमें से सिर्फ पानी की भाप निकलेगी। प्रदूषण नहीं होगा।

बसों का ईंधन भरना और रखरखाव एनटीपीसी ही संभालेगी, जबकि चालक और परिचालक उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी यमुना विकास प्राधिकरण की होगी। अब प्राधिकरण चाहता है कि इनकी व्यवस्था निजी स्तर से न होकर रोडवेज स्तर से की जाए। इसके लिए उन्होंने यूपीएसआरटीसी से मांग की है। हालांकि, वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। उधर, सीईओ आरके सिंह फिलहाल दो दिवसीय दौरे पर बेंगलुरु गए हैं। वह बुधवार को लौटेंगे। इस मामले में अधिकारी बुधवार को बैठक भी करेंगे।

विस्तार करने की भी योजना
यह बस सेवा फिलहाल यमुना प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा के आंतरिक हिस्सों को जोड़ते हुए नोएडा एयरपोर्ट तक चलाई जानी है, लेकिन बाद में इसे दिल्ली के साथ ही गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम तक चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा।

एनटीपीसी दादरी प्लांट में बसों के लिए हाइड्रोजन ईंधन तैयार होगा। खास बात यह है कि यह हाइड्रोजन शोधित किए गए गंदे पानी से बनाया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक शहर में यातायात प्रदूषण का बड़ा कारक माना जाता है। एयरपोर्ट की कई सड़क, एक्सप्रेसवे और हाईवे से कनेक्टिविटी होगी। यहां यातायात का दबाव अत्याधिक होगा। ऐसे में शहर की हवा को साफ रखने में यह परियोजना मदद करेगी।

Join The Discussion

Compare listings

Compare