दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए न्यू सिटी एक बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तौर पर आकार ले रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे एक अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली शहर बनाने जा रही है, जिसे राया अर्बन सेंटर के नाम से भी जाना जाएगा, वहीं इस शहर के बसने से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए जेवर एयरपोर्ट से कनेक्शन होने के कारण, जिससे टूरिज्म और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा, आइए जानते हैं कि इससे सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा.
यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने नए शहर के लिए मास्टर प्लान 2031 तैयार किया है. इस मास्टर प्लान को टेक्निकल रिव्यू और सुझावों के लिए दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) को भेजा गया है. रिपोर्ट मिलने के बाद, सुझावों को शामिल किया जाएगा और मास्टर प्लान को फाइनल किया जाएगा. बोर्ड और राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद, प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा.
न्यू सिटी लगभग 11,633 हेक्टेयर के एरिया में डेवलप किया जाएगा. शुरू में यह प्रोजेक्ट लगभग 9,000 हेक्टेयर तक सीमित था, लेकिन बाद में इसे लगभग 2,000 हेक्टेयर तक बढ़ाया गया. यह शहर यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में फैला होगा. प्लान के मुताबिक, यहां लगभग 14.6 लाख लोगों के रहने की व्यवस्था की जाएगी.
मास्टर प्लान के तहत रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के लिए लगभग 2,500 हेक्टेयर जमीन तय की गई है, जहां मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग, मॉडर्न हाउसिंग प्रोजेक्ट और सुविधाजनक रेजिडेंशियल कॉलोनियां डेवलप की जाएंगी. इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज के लिए लगभग 1,800 हेक्टेयर जमीन रिजर्व की गई है. इसके अलावा, 447 हेक्टेयर जमीन मिक्स्ड यूज के लिए रखी गई है, जहां हॉस्पिटल, स्कूल, कॉलेज, बाजार, होटल, शोरूम, पार्क और दूसरी सोशल सुविधाएं डेवलप की जाएंगी.
नया शहर पूरी तरह से स्मार्ट सिटी मॉडल पर डेवलप किया जाएगा. इसमें 24 घंटे बिजली और पानी की सप्लाई होगी. शहर की बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोलर एनर्जी और दूसरे अल्टरनेटिव एनर्जी सोर्स पर खास जोर दिया जाएगा. शहर में एक स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा.
इस प्रोजेक्ट के तहत पर्यटन विकास के लिए 1,520 हेक्टेयर जमीन रिज़र्व की गई है. यहां होटल, थीम पार्क, मनोरंजन केंद्र और सांस्कृतिक स्थल विकसित किए जाएंगे. इसके अलावा, 1,046 हेक्टेयर को ग्रीन एरिया, 586 हेक्टेयर को पार्क और 505 हेक्टेयर को रिवरफ्रंट के लिए तय किया गया है, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा.
न्यू सिटी के विकास से लगभग 8.5 लाख लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. इससे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, पलवल, NCR और आस-पास के जिलों को सीधा फायदा होगा. बढ़े हुए औद्योगिक निवेश से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आने की उम्मीद है.
यमुना अथॉरिटी के ACE CEO शैलेंद्र भाटिया के अनुसार आगरा एक पर्यावरण और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है. न्यू आगरा के विकास में इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. मास्टर प्लान की समीक्षा SPA द्वारा की जा रही है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. कुल मिलाकर, न्यू आगरा सिटी आने वाले सालों में दिल्ली-NCR के लिए एक नए आर्थिक, औद्योगिक और स्मार्ट शहरी केंद्र के रूप में उभरेगा.
न्यू आगरा सिटी के डेवलपमेंट से दिल्ली-NCR के जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार के नए मौके (IT, टूरिज्म, इंडस्ट्री) और एक नया इकोनॉमिक हब मिलेगा, जिससे गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, पलवल और हाथरस जैसे जिलों में डेवलपमेंट की रफ्तार तेज होगी, खासकर यमुना एक्स्प्रेसवे के जरिए जेवर एयरपोर्ट से कनेक्शन होने के कारण, जिससे टूरिज्म और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा. बता दें कि यह नया शहर मथुरा के राया इलाके के पास बनाया जाएगा.
यह लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है. AI के काल्पनिक चित्रण का भी जी दिल्ली-एनसीआर हूबहू होने का दावा या पुष्टि नहीं करता है.