ग्रेटर नोएडा में बसेगी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप! 4 बड़े प्लॉट्स की होगी नीलामी जानिए डेट और नियम

ग्रेटर नोएडा पिछले कुछ साल से बड़ा हॉटस्पॉट बनता रहे हैं. खासकर जेवर एयरपोर्ट के आने के बाद यहां की जमीन सोना बन गई है. अब दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत विकसित की जा रही इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (IITGNL) ने ग्रुप हाउसिंग प्लॉट्स के लिए एक बड़ी योजना लॉन्च की है. यह टाउनशिप जेवर एयरपोर्ट और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जंक्शन पर स्थित है.

IITGNL के ये ग्रुप हाउसिंग प्लॉट्स केवल बड़े बिल्डर्स के लिए हैं. योजना उन बड़े कंसोर्टियम (अधिकतम 5 सदस्य) और कंपनियों के लिए जो ग्रेटर नोएडा में निवेश करना चाहते हैं.

योजना में कुल 4 बड़े रेजिडेंशियल प्लॉट्स (RE-1, RE-2, RE-3, RE-4) नीलामी के लिए हैं. सबसे छोटे प्लॉट यानी RE-2 का रिजर्व प्राइस ही करीब 153.50 करोड़ रुपए है. सबसे बड़े प्लॉट यानी RE-3 का रिजर्व प्राइस 416.93 करोड़ रुपए से ज्यादा है.

प्लॉट्स के लिए रजिस्ट्रेशन 2 फरवरी 2026 दोपहर 3 बजे से शुरू हो गए हैं और यह 23 फरवरी 2026 शाम 5 बजे तक चलेंगे. ई-नीलामी की तारीख अलग से घोषित की जाएगी.

ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट एक स्मार्ट बाय डिजाइन है. यानी यहां पर आपको प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा. प्लॉट पर निर्माण काम शुरू करने के लिए पहले से ही सभी सुविधाएं होती है, उसे प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर कहते हैं.

पूरी टाउनशिप में चौड़ी सड़कें, समर्पित साइकिल ट्रैक, 220 KV सब-स्टेशन होगा. 24X7 बिजली-पानी की सप्लाई मिलेगी. अंडरग्राउंड यूटिलिटीज में बिजली, पानी और दूसरी तारों के लिए अंडरग्राउंड डक्ट्स मिलेंगे, जो SCADA सिस्टम से नियंत्रित होंगे. वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ऑटोमेटेड वेस्ट कलेक्शन सिस्टम होगा. पूरी टउनशिप में ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क से Wi-fi, इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सिस्टम से CCTV सर्विलांस की सुविधा होगी.

यह केवल औद्योगिक नहीं बल्कि ‘इंटीग्रेटेड’ है, जिसका अर्थ है कि यहाँ काम करने वालों के लिए पास में ही विश्वस्तरीय आवासीय क्षेत्र भी विकसित किए गए
हैं. अनुमान है कि इस टाउनशिप के पूरी तरह शुरू होने पर लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.

IITGNL ने आवंटन के नियमों को बेहद सख्त बनाया है. यह फ्री होल्ड नहीं बल्कि लीज होल्ड जमीन है. आपको 78 साल की लीज पर मिलेगी. अलॉटमेंट लेटर मिलने के महज 90 दिनों के अंदर 100 फीसदी प्रीमियम जमा करना होगा. बिल्डर को 7 साल के अंदर अपने प्रोजेक्ट को पूरा करना होगा. पहले फेज का निर्माण और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट को तीन साल के अंदर लेना जरूरी है. हर साल 1 फीसदी लीज रेंट देना होगा, जो हर 10 साल में अपने आप 50 फीसदी बढ़ जाएगा.

लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है.एआई के काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.

Join The Discussion

Compare listings

Compare